" इस्लाम के अनुसार, अल्लाह तआला ने मानवजाति के मार्गदर्शन के लिए अनेक नबियों और पैगम्बरों पर पुस्तकें और धर्मग्रंथ (छोटे-छोटे कोड/पृष्ठ) अवतरित किए हैं। इन सभी पुस्तकों का उल्लेख कुरान में है और अल्लाह की सभी अवतरित पुस्तकों पर विश्वास करना मुसलमानों के ईमान का हिस्सा है"।
1) तोरा
पैगंबर मूसा (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अवतरित।
- निर्देश
इसमें अल्लाह की महानता, एकेश्वरवाद (तौहीद), और उस समय के बनी-इस्राइल समुदाय के लिए नैतिक और कानूनी नियम शामिल हैं। यहूदी धर्म की पवित्र पुस्तक (पेंटाटेच या मूसा की पाँच पुस्तकें) का एक भाग इसी से संबंधित माना जाता है।
2) ज़बूर (भजन)
पैगंबर दाऊद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अवतरित।
- निर्देश
ज़बूर मुख्यतः अल्लाह की स्तुति, महिमा और प्रार्थनाओं का संग्रह था। इसमें कानून या विस्तृत शरिया की बजाय प्रशंसा और आराधना पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया था। इसे ईसाई बाइबल के पुराने नियम के भजनों से संबंधित माना जाता है।
3) इंजील
पैगंबर ईसा (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अवतरित।
- निर्देश
इंजील में अल्लाह की एकता का संदेश, नैतिक शिक्षाएँ और आत्मा की पवित्रता पर ज़ोर दिया गया था। इसे ईसाई बाइबल के नए नियम के इंजील से संबंधित माना जाता है।
4) कुरान
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (जो इस्लाम के अंतिम पैगम्बर हैं) पर अवतरित।
- मार्गदर्शन
कुरान अल्लाह की अंतिम दिव्य पुस्तक है और इसे समस्त मानवजाति के लिए एक पूर्ण और संरक्षित मार्गदर्शन माना जाता है। इसमें एकेश्वरवाद, नैतिक मूल्य, कानून, सामाजिक न्याय, उपासना के नियम और पूर्ववर्ती राष्ट्रों की कहानियाँ शामिल हैं। कुरान का संदेश सार्वभौमिक है और क़यामत के दिन तक कायम रहता है।
कुरान में कुल 114 सूरह (अध्याय) हैं। प्रत्येक सूरह का एक विशिष्ट नाम है, जो अक्सर उस सूरह में उल्लिखित किसी मुख्य शब्द, विषय, घटना या व्यक्ति के नाम पर रखा जाता है।
इन सूरहों की लंबाई अलग-अलग होती है, जिनमें सबसे लंबी सूरह अल-बक़रा (286 आयतें) है और कई छोटी सूरहों में केवल कुछ ही आयतें हैं।
यह लिस्ट कुरान की सभी सूरतों के नाम और उनका सामान्य अर्थ बताती है। इन सूरतों में विभिन्न विषयों, कानूनों, मार्गदर्शन, ऐतिहासिक घटनाओं और भविष्यवाणियों का ज़िक्र किया गया है।
कुरान की सभी 114 सूरतें उनके नामों के साथ
अल-फ़ातिहा (The Opening - शुरुआत)
अल-बकरा (The Cow - गाय)
आले-इमरान (The Family of Imran - इमरान का परिवार)
अन-निसा (The Women - महिलाएँ)
अल-माइदा (The Table Spread - दस्तरख़्वान)
अल-अनआम (The Cattle - मवेशी)
अल-आराफ (The Heights - ऊँचाइयाँ)
अल-अनफ़ाल (The Spoils of War - युद्ध का माल)
अत-तौबा (The Repentance - तौबा)
यूनुस (Jonah - नबी यूनुस)
हूद (Hud - नबी हूद)
यूसुफ़ (Joseph - नबी यूसुफ़)
अर-रअद (The Thunder - गरज)
इब्राहीम (Abraham - नबी इब्राहीम)
अल-हिज्र (The Rocky Tract - पथरीली घाटी)
अन-नहल (The Bee - मधुमक्खी)
अल-इसरा (The Night Journey - रात की यात्रा)
अल-कहफ़ (The Cave - गुफा)
मरियम (Mary - मरियम)
ताहा (Ta-Ha - ताहा)
अल-अंबिया (The Prophets - पैगंबर)
अल-हज्ज (The Pilgrimage - हज)
अल-मुमिनून (The Believers - ईमान वाले)
अन-नूर (The Light - नूर)
अल-फ़ुरक़ान (The Criterion - कसौटी/मानदंड)
अश-शुअरा (The Poets - शायर)
अन-नम्ल (The Ant - चींटी)
अल-क़सस (The Stories - कहानियाँ)
अल-अनकबूत (The Spider - मकड़ी)
अर-रूम (The Romans - रोमी)
लुक़मान (Luqman - लुक़मान)
अस-सजदा (The Prostration - सजदा)
अल-अहज़ाब (The Confederates - गठबंधन)
सबा (Sheba - सबा)
फ़ातिर (The Originator - बनाने वाला)
या-सीन (Ya-Sin - यासीन)
अस-साफ़्फ़ात (Those who Set the Ranks - सफ़ बाँधने वाले)
साद (Sad - साद)
अज़-ज़ुमर (The Troops - गिरोह/समूह)
ग़ाफ़िर (The Forgiver - माफ़ करने वाला)
फ़ुस्सिलत (Explained in Detail - विस्तार से बताया गया)
अश-शूरा (The Consultation - परामर्श)
अज़-ज़ुख़रुफ़ (The Ornaments of Gold - सोने के आभूषण)
अद-दुखान (The Smoke - धुआँ)
अल-जासिया (The Crouching - घुटने टेकने वाला)
अल-अहक़ाफ़ (The Wind-Curved Sandhills - घुमावदार रेत के टीले)
मुहम्मद (Muhammad - मुहम्मद)
अल-फ़तह (The Victory - विजय)
अल-हुजुरात (The Private Chambers - निजी कक्ष)
क़ाफ़ (Qaf - क़ाफ़)
अज़-ज़ारियात (The Scatterers - बिखेरने वाली हवाएँ)
अत-तूर (The Mount - पहाड़)
अन-नज्म (The Star - तारा)
अल-क़मर (The Moon - चाँद)
अर-रहमान (The Beneficent - सबसे मेहरबान)
अल-वाक़िआ (The Inevitable - निश्चित घटना)
अल-हदीद (The Iron - लोहा)
अल-मुजादिला (The Pleading Woman - बहस करने वाली औरत)
अल-हश्र (The Exile - निर्वासन)
अल-मुम्तहना (She that is to be Examined - परखी जाने वाली औरत)
अस-सफ़्फ़ (The Ranks - पंक्तियाँ)
अल-जुमुआ (Congregation Prayer - जुमे की नमाज़)
अल-मुनाफ़िक़ून (The Hypocrites - मुनाफ़िक़)
अत-तग़ाबुन (Mutual Disillusion - आपसी नुकसान)
अत-तलाक (The Divorce - तलाक़)
अत-तह्रीम (The Prohibition - निषेध)
अल-मुल्क (The Sovereignty - राज्य/बादशाही)
अल-क़लम (The Pen - क़लम)
अल-हाक़्क़ाह (The Reality - वास्तविकता)
अल-मआरिज (The Ascending Stairways - सीढ़ियाँ)
नूह (Noah - नबी नूह)
अल-जिन्न (The Jinn - जिन्न)
अल-मुज़म्मिल (The Enshrouded One - लिपटा हुआ)
अल-मुद्दस्सिर (The Cloaked One - चादर ओढ़ा हुआ)
अल-क़ियामाह (The Resurrection - क़यामत)
अल-इंसान (The Man - इंसान)
अल-मुर्सलात (The Emissaries - भेजी गई हवाएँ/फ़रिश्ते)
अन-नबा (The Tidings - ख़बर)
अन-नाज़िआत (Those who drag forth - खींचने वाले)
अबसा (He Frowned - वह मुँह फेर लिया)
अत-तक़वीर (The Overthrowing - लपेटना)
अल-इनफ़ितार (The Cleaving - फटना)
अल-मुतफ़्फ़िफ़ीन (The Defrauding - कम तौलने वाले)
अल-इंशिक़ाक़ (The Sundering - फटना/विखंडन)
अल-बुरूज (The Mansions of the Stars - सितारों के ठिकाने)
अत-तारिक़ (The Nightcomer - रात को आने वाला)
अल-अअला (The Most High - सबसे ऊँचा)
अल-ग़ाशिया (The Overwhelming - छा जाने वाली)
अल-फ़ज्र (The Dawn - भोर)
अल-बलद (The City - शहर)
अश-शम्स (The Sun - सूरज)
अल-लैल (The Night - रात)
अद-दुहा (The Morning Brightness - सुबह की रोशनी)
अल-इंशिराह / अश-शरह (The Expansion - छाती खोल देना)
अत-तीन (The Fig - अंजीर)
अल-अलक़ (The Clot - खून का थक्का)
अल-क़द्र (The Power - ताक़त/क़द्र)
अल-बय्यिनाह (The Clear Evidence - स्पष्ट प्रमाण)
अज़-ज़लज़लाह (The Earthquake - भूकंप)
अल-आदियात (The Chargers - दौड़ने वाले (घोड़े))
अल-क़ारिआ (The Calamity - खड़खड़ाने वाली मुसीबत)
अत-तकासुर (Vying for increase - बढ़ाने की होड़)
अल-अस्र (The Declining Day/Time - ज़माना/वक्त)
अल-हुमज़ा (The Slanderer - ऐब निकालने वाला)
अल-फ़ील (The Elephant - हाथी)
क़ुरैश (Quraish - क़ुरैश)
अल-माऊन (The Small Kindness - छोटी मदद)
अल-कौसर (The Abundance - बहुत ज़्यादा भलाई)
अल-काफ़िरून (The Disbelievers - काफ़िर)
अन-नस्र (The Divine Support - मदद)
अल-मसद (The Palm Fiber - खजूर की रस्सी)
अल-इखलास (The Sincerity - निष्ठा)
अल-फ़लक़ (The Daybreak - सुबह)
अन-नास (Mankind - लोग)
अन्य सहूफ़ (संहिताएँ)
- इस्लाम यह भी मानता है कि इन चार प्रमुख पुस्तकों के अलावा, अल्लाह तआला ने कुछ अन्य नबियों पर सहीफ़ (छोटी संहिताएँ या ग्रन्थ) भी अवतरित किए। इनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं:
- सहीफ़े इब्राहीमी (अब्राहम के ग्रन्थ): पैगम्बर इब्राहीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को।
- हालाँकि इन सहीफ़ों के मूल पाठ अब मौजूद नहीं हैं, फिर भी कुरान इन पर ईमान लाने का आदेश देता है।
मार्गदर्शन का सार
इन सभी स्वर्गीय पुस्तकों और धर्मग्रंथों का मूल संदेश एक ही है:
- तौहीद (एकेश्वरवाद)
एक अल्लाह में विश्वास और उसकी इबादत।
- पवित्रता और तक़वा (धार्मिकता)
नेक कर्म करना, पाप से बचना और अल्लाह के भय से जीवन व्यतीत करना।
- आख़िरत में विश्वास
क़यामत के दिन, न्याय, स्वर्ग और नर्क में विश्वास।
- नबियों में विश्वास
अल्लाह द्वारा भेजे गए सभी नबियों और रसूलों में विश्वास।
" क़ुरआन इस बात पर ज़ोर देता है कि हालाँकि पिछली किताबों में इंसानों ने बदलाव किए हैं, फिर भी अल्लाह ने क़ुरआन को सुरक्षित रखा है ताकि उसका मूल संदेश बरकरार रहे और क़यामत के दिन तक इंसानों के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक के रूप में काम करे "।
क्या आप इनमें से किसी किताब या नबी के बारे में और जानना चाहेंगे?
Thank you for Read Like and Share
No comments:
Post a Comment