" इस्लाम में, جامع एक खूबसूरत ज़िंदगी और दुनिया व आख़िरत दोनों में क़ब्र की सज़ा से सुरक्षा के लिए एक बहुत ही प्रसिद्ध और व्यापक दुआ है। यह दुआ क़ुरान की सूरह अल-बक़रा (आयत 201) में मौजूद है और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) इसे अक्सर पढ़ते थे।"
:رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ :
"रब्बना आतिना फिद्दुनिया हसनतंव व फिल आखिरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार"
" ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फरमा और आखिरत में भी भलाई अता फरमा, और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।"
इस दुआ का महत्व
यह दुआ बहुत ख़ास है क्योंकि इसमें दुनिया और आख़िरत की सारी भलाई एक ही बार में माँगी गई है।
"दुनिया में भलाई" (हसनत फ़िद-दुनिया) का अर्थ है:
स्वास्थ्य
पवित्र पत्नी और बच्चे
अनुमति योग्य आजीविका (हलाल कमाई)
शांति और सुरक्षा
अच्छी नमाज़ पढ़ने की क्षमता
हर मुश्किल से सुरक्षा
"आख़िरत में भलाई" (हसनत फ़िद-आख़िर) का अर्थ है:
क़ब्र की सज़ा से सुरक्षा
क़यामत के दिन की ज़लीलता से सुरक्षा
आसान हिसाब
स्वर्ग में प्रवेश
"और हमें नर्क की सज़ा से बचा" (वा क़िना अदहबन-नार) यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दुआ है जो इस दुनिया और आख़िरत में हर तरह की सज़ा और मुसीबत से सुरक्षा की दुआ करती है।
" यह दुआ पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बहुत पसंद थी और उन्होंने लोगों को इसे बार-बार पढ़ने की सलाह दी थी। इसलिए, आप भी हर नमाज़ के बाद या जब भी मौका मिले, यह दुआ पढ़ सकते हैं। यह एक बहुत ही शक्तिशाली दुआ है जिसमें हर तरह की भलाई और सुरक्षा की दुआ की जाती है।"
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